इंस्टाग्राम सीईओ का कोर्ट में बयान: ’16 घंटे ऐप चलाना लत नहीं, समस्या है’

अमेरिका की एक अदालत में इंस्टाग्राम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एडम मोसेरी ने युवाओं की मानसिक सेहत पर प्लेटफॉर्म के प्रभाव को लेकर अपना पक्ष रखा। लॉस एंजेलिस में चल रहे इस मुकदमे में उन्होंने 16 घंटे तक ऐप इस्तेमाल करने को ‘समस्यात्मक उपयोग’ करार दिया, लेकिन इसे लत मानने से साफ इनकार कर दिया। यह मामला इस बात पर केंद्रित है कि क्या सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म के कारण युवाओं को होने वाले मानसिक नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं। करीब छह हफ्ते तक चलने वाले इस ट्रायल का फैसला पूरे उद्योग के लिए मिसाल बन सकता है।

लत या आदत? मोसेरी ने दी अलग परिभाषा

सुनवाई के दौरान जब अदालत ने सवाल उठाया कि क्या एक दिन में 16-16 घंटे इंस्टाग्राम चलाना लत नहीं है, तो मोसेरी ने जवाब दिया कि इसे ‘एडिक्शन’ के बजाय ‘प्रॉब्लेमैटिक यूज’ कहना ज्यादा उपयुक्त होगा। उन्होंने तर्क दिया कि बहुत से लोग देर रात तक टीवी देखते हैं या घंटों ऑनलाइन रहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे लत के शिकार हैं। उनके अनुसार, कुछ उपयोगकर्ता लंबे समय तक ऐप पर रहने के बावजूद सामान्य जीवन जी सकते हैं। इस दलील ने कोर्ट में मौजूद अभिभावकों को काफी नाराज कर दिया, जो अपने बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर पहले से ही चिंतित थे।

300 शिकायतों का मामला और फिल्टर पर सवाल

मुकदमे की मुख्य शिकायतकर्ता एक युवती (K.G.M.) का मामला सामने आया, जिसने इंस्टाग्राम पर बुलिंग की 300 से अधिक रिपोर्ट दर्ज कराई थीं। मोसेरी ने स्वीकार किया कि उन्हें इन शिकायतों की कोई जानकारी नहीं थी। इसके अलावा, कोर्ट में उन फिल्टरों पर भी गंभीर सवाल उठे जो चेहरे की बनावट बदल देते हैं। मेटा के अपने अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि ये फिल्टर युवाओं के आत्मविश्वास को कमजोर कर सकते हैं। बावजूद इसके, कंपनी ने इन पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में देरी की। यह मुद्दा इस बात को उजागर करता है कि कंपनी के भीतर भी इस तरह के फीचर्स के प्रभाव को लेकर मतभेद रहे हैं।

अदालत के बाहर गुस्सा और दर्द

कोर्ट रूम के बाहर भी माहौल तनावपूर्ण रहा। कई अभिभावक और प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एकत्र हुए। इनमें से एक मारियानो जैनिन थे, जिन्होंने 2021 में अपनी 14 वर्षीय बेटी मिया को खो दिया था। वे लंदन से विशेष रूप से इस ट्रायल को देखने आए थे। उन्होंने कहा कि टेक कंपनियों के पास बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त तकनीक और संसाधन हैं, लेकिन वे अपने बिजनेस मॉडल को बदलने से कतराती हैं। उनके अनुसार, कंपनियों को मुनाफे से ज्यादा बच्चों की भलाई को प्राथमिकता देनी चाहिए।

मेटा और अन्य कंपनियों पर बढ़ता दबाव

मेटा प्लेटफॉर्म्स के वकीलों ने अपनी सफाई में तर्क दिया कि शिकायतकर्ता युवती के जीवन में इंस्टाग्राम के अलावा भी कई चुनौतियां थीं, इसलिए उसकी मानसिक परेशानियों के लिए सिर्फ प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस केस में यूट्यूब का नाम भी शामिल है, जबकि स्नैपचैट और टिकटॉक ने इसी तरह के मामलों में अदालत के बाहर समझौता कर लिया है। आने वाले दिनों में मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और यूट्यूब के प्रमुख नील मोहन के गवाही देने की संभावना है। यह मुकदमा न केवल इंस्टाग्राम, बल्कि पूरे सोशल मीडिया उद्योग की जवाबदेही तय करने में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।