डिजिटल इंडिया का दशक: ब्रॉडबैंड में चार गुना उछाल, डेटा की कीमत 97% घटी
पिछले दस वर्षों में देश में इंटरनेट सेवाओं का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत न सिर्फ कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ, बल्कि डेटा की लागत में भी रिकॉर्ड गिरावट आई है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 2014-15 के मुकाबले 2024-25 तक ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या 25 करोड़ से बढ़कर 103 करोड़ हो गई, जो 400 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
गांवों तक पहुंची मोबाइल कनेक्टिविटी
डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिला है। मोबाइल नेटवर्क अब 5.27 लाख से बढ़कर 6.35 लाख गांवों तक पहुंच चुका है। वहीं, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार भी तेज गति से हुआ है, जो मात्र 358 किलोमीटर से बढ़कर 6.92 लाख किलोमीटर से अधिक हो गया है। इस बुनियादी ढांचे ने दूरदराज के इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट की राह खोल दी है।
डेटा खपत में जबरदस्त इजाफा
इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ डेटा उपयोग में भी भारी उछाल आया है। प्रति उपयोगकर्ता मासिक डेटा खपत 61.66 एमबी से बढ़कर 25.25 जीबी हो गई है। सबसे चौंकाने वाला बदलाव डेटा की कीमत में आया है। जहां 2014 में 1 जीबी डेटा की कीमत 269 रुपये थी, वहीं अब यह घटकर मात्र 7.9 रुपये रह गई है। यह करीब 97 प्रतिशत की गिरावट है, जिसने आम आदमी के लिए इंटरनेट को बेहद सस्ता बना दिया है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली मजबूती
जुलाई 2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया अभियान का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट को सुलभ बनाना, लागत कम करना और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना रहा है। इसी के तहत देश में अब तक 143 करोड़ से अधिक आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं। यह पहचान प्रणाली कई सरकारी और निजी सेवाओं की रीढ़ बन गई है।
यूपीआई ने बदला भुगतान का तरीका
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने क्रांति ला दी है। वर्तमान में 46 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता यूपीआई से जुड़े हैं, जिसमें 685 बैंक शामिल हैं। यह प्रणाली भारत के 81 प्रतिशत डिजिटल भुगतान और दुनिया के लगभग 49 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन में योगदान देती है।
जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) का सफल मॉडल
जनधन, आधार और मोबाइल के एकीकरण (JAM) ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद की है। इस माध्यम से अब तक 49.82 लाख करोड़ रुपये सीधे लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।
डिजीलॉकर और UMANG का बढ़ता दायरा
डिजिटल दस्तावेजों के भंडारण के लिए DigiLocker प्लेटफॉर्म पर 67 करोड़ उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं, जहां 967 करोड़ से अधिक दस्तावेज जारी किए गए हैं। वहीं, सरकारी सेवाओं तक पहुंच के लिए UMANG एप पर 2,446 सेवाएं उपलब्ध हैं और इसके 10.51 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड उपयोगकर्ता हैं। ये प्लेटफॉर्म नागरिकों को डिजिटल माध्यम से कागजी कार्रवाई से मुक्ति दिला रहे हैं।